Nivedan Mishra

गुमाँ हर किसी को यकीं दिख रहा है
जो सच है किसी को नहीं दिख रहा है

ये डर है किसी का या बेहोश हालत
कि आँखों से अब कुछ-नहीं दिख रहा है

जो है सामने सब फरेब-ए-नज़र है
उसे देखिए जो नहीं दिख रहा है

मुसलसल नज़र आ रही है क़यामत
कि आँखों में रोशन-जबीं दिख रहा है

बनाई गई है ये तस्वीर कैसी?
कि चेहरा मुकम्मल नहीं दिख रहा है

बयाबाँ से हम देखते हैं ये दुनिया
मकाँ दिख रहे हैं मकीं दिख रहा है
Nivedan Mishra

Nivedan Mishra | We The Sukhanwar