Asad Khan Lakhimpuri (Barwar)

आज ये कैसी शब आई है
दर्द -ओ- अलम है तन्हाई है

अश्क़ रवाँ हैं इन आँखों से
याद किसी की फ़िर आई है

रक़्स घटाओं के हर जानिब
ज़ुल्फ़ किसी ने लहराई है

रूठ गईं आंखों से नींदें
दूर जो गूंजी शहनाई है

मेरा हाल-ए-परेशां पूछा
उसकी असद ये दानाई है
Asad Khan Lakhimpuri (Barwar)

Asad Khan Lakhimpuri (Barwar) | We The Sukhanwar