Rubi Gupta satyendra

उंगलियाँ मुझपे जो सरकार उठा देते हो
और बेहतर मेरा किरदार बना देते हो

जाम में ज़ह्र को चुपके से मिला देते हो
उम्र लम्बी हो मेरी ये भी दुआ देते हो

रास्तों पर मेरे कांटों को बिछाने वालो
तुम मेरे पैरों की रफ़्तार बढ़ा देते हो

आइना तुमको दिखाने की करे जो कोशिश
तुम भी उस पर कई इल्ज़ाम लगा देते हो

घोंट देते हो गला पहले मेरी चाहत का
और फिर मुझको हसीं ख़्वाब दिखा देते हो

जि़ंंदगी जीने के आदाब भी कुछ होते हैं
बाअदब हो के भी यह बात भुला देते हो

आपसे उसको ही ज्यादा है शिकायत 'रूबी'
आप जिसपे ये दिलो जान लुटा देते हो
Rubi Gupta satyendra

Rubi Gupta satyendra | We The Sukhanwar