हस्ती हमारी यूँ ही नहीं नामचीन है
उनकी फ़लक से ऊँची हमारी ज़मीन है
जब भी उसे पुकार दूँ आएगा सामने
मुझको मेरे गुमान पे कामिल यक़ीन है
अहबाब मेरे इस को हवा देते रह गए
अफ़साना मेरा इसलिए ताज़ा तरीन है
करती किसी के साथ कभी ये वफ़ा नहीं
हैरत है फिर भी ज़िंदगी इतनी हसीन है
सीने में अब किसी के भी हस्सास दिल नहीं
इस दौर का इंसाँ है या कोई मशीन है
हँस-हँस के इसकी नाज़-ओ-अदा तो उठाइए
फिर देखिए कि ज़िंदगी कितनी हसीन है
तन्हाइयों में और है महफ़िल में और है
'रूबी' उसी के वास्ते तो आफ़रीन है
Rubi Gupta satyendra