Rubi Gupta satyendra

हस्ती हमारी यूँ ही नहीं नामचीन है
उनकी फ़लक से ऊँची हमारी ज़मीन है

जब भी उसे पुकार दूँ आएगा सामने
मुझको मेरे गुमान पे कामिल यक़ीन है

अहबाब मेरे इस को हवा देते रह गए
अफ़साना मेरा इसलिए ताज़ा तरीन है

करती किसी के साथ कभी ये वफ़ा नहीं
हैरत है फिर भी ज़िंदगी इतनी हसीन है

सीने में अब किसी के भी हस्सास दिल नहीं
इस दौर का इंसाँ है या कोई मशीन है

हँस-हँस के इसकी नाज़-ओ-अदा तो उठाइए
फिर देखिए कि ज़िंदगी कितनी हसीन है

तन्हाइयों में और है महफ़िल में और है
'रूबी' उसी के वास्ते तो आफ़रीन है
Rubi Gupta satyendra

Rubi Gupta satyendra | We The Sukhanwar