क्या मुश्किल है,धूप का टुकड़ा बादल बन कर छा सकता है
गर इंसान हौसला कर ले पत्थर भी पिघला सकता है
जिस ने अना को जीत लिया बा-क़ाबिल-ए-इश्क़ हुआ वो समझो
जिसने इश्क़ का घूँट पिया बस वो ही 'राम' को पा सकता है
सिर्फ़ नज़र भर पा लेने से सच्चाई थोड़ी दिखती है
जिसने नज़र अता की है वो चाहे तो दिखला सकता है
अज़ख़ुद समझ गया तो बेहतर वरना है सब कोशिश बेकार
कोई नहीं है इस दुनिया में जो दिल को समझा सकता है
मेरा क्या है मैं तो उस पर जान लुटाता ही जाऊँगा
यार मेरा जब चाहे मुझ को ग़ैरों सा ठुकरा सकता है
जिस के दिल में दर्द मुहब्बत और उम्मीद का दीया होगा
सिर्फ़ वही ग़ज़लों को मेरे जी सकता है, गा सकता है
'एहसास' मियाँ महबूब के हाथों में इस दिल की डोर है, वो
जब चाहे बहला सकता है जब चाहे तड़पा सकता है
Vishal Ojha 'Ehsaas'