Vishal Ojha 'Ehsaas'

मेरे जीते जी ही मेरा इंतिख़ाब कर दिया
ज़र्रे को नवाज़िशों ने आफ़ताब कर दिया

कर न पाया उस के क़र्ज़ का हिसाब मैं कभी
यूँ तो मैंने एक-एक का हिसाब कर दिया

मुख़्तसर सी ज़िन्दगी के ख़्वाब हैं बड़े-बड़े
ख़वाब ही ने ज़िन्दगी को या'नी ख़्वाब कर दिया

उग रहा था मेरे दिल की शाख़ पे समर कोई
छू के उस ने ऊँगलियों से माहताब कर दिया

अाज अपने हाल के हैं ख़ुद ही ज़िम्मेदार हम
एक-दूसरे को हम ने ख़ुद ख़राब कर दिया

और कुछ बचा न था सिवाय हौसलों के पास
मुझ को मेरे हौसलों ने कामयाब कर दिया

हाए मेरे दिलनवाज़, हाए हाए क्या है ये ?
ज़िन्दगी ने ज़िन्दगी को बेहिजाब कर दिया
Vishal Ojha 'Ehsaas'