फूल चुभने लगे हर ख़ुशी के मुझे
ख़्वाब डसने लगे ज़िन्दगी के मुझे ।
आ गई रास है मुझको नाकामियाँ
गीत अच्छे लगे बेबसी के मुझे ।
बन गया है अँधेरा मेरा हमसफ़र
छोड़ साथी गए रौशनी के मुझे ।
आ गया हूँ चमन से मैं वीराने में
रंग फीके लगे हर कली के मुझे।
चैन जब लूट मेरा गया दोस्तों
दर्द अच्छे लगे आदमी के मुझे ।
दिल जला, घर जला, ज़िन्दगी जल गई
ये सिले हैं मिले आशिक़ी के मुझे ।
मेरे दुश्मन तू अब दुश्मनी ही निभा
कोई तोहफ़े न दे दोस्ती के मुझे ।
AJAY PRASAD