Danish Balliavi

मेरा तेरा संगम कैसा
नफ़रत में पेच-ओ-ख़म कैसा

नफ़रत के हामी है तू फिर
छत पे प्यार का परचम कैसा

आँख में आँसू देने वाला
यार तू अपना हमदम कैसा

ग़म से भरी है ज़ीस्त हमारी
पर ख़ुशियों का मौसम कैसा

चोट जो तूने दिल पे दिया है
हाथ में तेरा मरहम कैसा

जिसने हर पल ठुकराया है
वो जानम भी जानम कैसा

'दानिश' तेरी मौत पे आँसू
जल्लादों का मातम कैसा
Danish Balliavi