मासूम दिल को आज दुखाना पड़ा मुझे उल्फ़त के सब ख़तों को जलाना पड़ा मुझे आसान था न उनको भुलाना मिरे लिए मजबूरियां थी ऐसी भुलाना पड़ा मुझे दर्द -ओ- अलम जहां से छुपाने के वास्ते मुस्कान लब पे झूठी सजाना पड़ा मुझेAsad Khan Lakhimpuri (Barwar)