Danish Balliavi

मेरे बस नाम पे तलवार उठाने वाले
दुश्मनी मुझसे निभाते हैं निभाने वाले

रब हिफ़ाज़त मेरी करता है कई सालों से
ये मुझे ख़ाक मिटाएँगे ज़माने वाले

आब-ए-ज़म ज़म तो पिलाएगा नहीं कोई यहाँ
हर जगह मिलते हैं बस ज़हर पिलाने वाले

किस तरह दर्द को मैं पेश करूँ लफ़्ज़ों से
याद आते हैं बहुत दिल को दुखाने वाले

उनके दीदार से 'दानिश' को सुकूँ मिलता है
कितने बे-दर्द हैं ये नज़रें चुराने वाले
Danish Balliavi