क्या कर लोगे ख़्वाब लिये गर बैठ गये
खाली पद पर और भी बेहतर बैठ गये
मैंने तुमको एक नज़र ही देखा था
तुम तो सीधा दिल के अंदर बैठ गये
मैंने सोचा दिल की कुछ कह दूँ तुमसे
तुम अपने ही ग़म को लेकर बैठ गये
चली ज़रा -सी अफ़वाहों की आँधी तो
कितने ख़्वाबों की दीवारें - दर बैठ गये
किसी और ने अगर आग सुलगायी थी
तुम तो अपना ही सब खोकर बैठ गये
अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'