दिन भर खूब कमाया लेकिन, मुँह तक गया निवाला बासी।हम यदि जिम्मेदार न होते, कट ही जाती अच्छी- खासी।अपना सब अपनों में देकर, अपने हक बस इतना आया।तंग जेब, उम्मीद अधूरी, कुछ ताने, कुछ थकन, उदासी।।अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'