इस स्वप्न सरीखी दुनिया में
गर मुझसे मिलने आ जाते
नैनों की प्यास बुझा लेते
कुछ मधुरिम गीत सुना लेते
नयनों के मदिरालय को हम
अधरों से अपने पी लेते
बेरंग पडी इस दुनिया में
थोड़ा हसकर भी जी लेते
नयन निहार रहे पथको
हम फूलों से द्वार सजा देते
इस स्वप्न सरीखी दुनिया में
गर मुझसे मिलने आ जाते
महक गया है उपवन सारा
कलियों ने घूंघट डाला
पग डगमग डगमग होते हैं
नैनों से छलक रही हाला
हूं प्रेम पथिक अंजान डगर
तुम राह अगर बतला देते
इस स्वप्न सरीखी दुनिया में
गर मुझसे मिलने आ जाते
इस फैली धवल चांदनी में
आओ मधु का पान करे
यह बीत ना जाए स्वर्णिम पल
अधरो का अमृत दान करे
इस क्रूर काल का पता नहीं
हम ये गीत अधूरा गा लेते
इस स्वप्न सरीखी दुनिया में
गर मुझसे मिलने आ जाते
Anilgiri