अंजान इश्क़ से थे हमें कुछ खबर न थी।सागर से क़ल्ब में मेरे कोई लहर न थी।वो वक़्त भी क्या खूब था, बाहम थे साथ में।हाथों में तेरा हाथ था, हिज्र-ए-सहर न थी।Kamran Abbas