मुझे है दहशत मिरे सनम से वो मेरे अरमां जला न डालें
मेरे मुक़ाबिल में आए तो वो मुझी पे तोहमत लगा न डालें
जो राज़दाँ हैं वो दोस्त मेरे अज़ीज़ हैं जान से ज़ियादा
उन्हीं से डर है ज़माने भर को वो राज़ मेरे बता ना डालें
मुसव्विरों से ये जा के कह दो कि उनकी तस्वीर जब बनाएं
ज़ुबां में डालें शीरीन रंगत निगाह में रंग-ए-वफा न डालें
बड़ी ही मिन्नत के बाद राज़ी हुए हो आने को तुम सितमग़र
तुम्हारे आने के वादे भर से हम अपना कमरा सजा न डालें
वो प्यार के ख़त जिन्हें दिये थे नहीं थे क़ासिद रक़ीब थे वो
वो जाते जाते हमारे ख़त के हवा में पुर्ज़े उड़ा न डालें
इक आध सिगरेट और बोतल यही तो ज़ीनत हैं अपने घर की
हमें ये डर है हम अपने घर को शराबख़ाना बना न डालें
ख़ुदा सलामत रखे सनम को वो मेरी तुरबत पे आ गए हैं
चराग़ रौशन तो कर रहे हैं वो हाथ अपना जला न डालें
मेरे ही दुश्मन मेरे ही घर में मेरी अयादत को आ चलें हैं
दवाऐं सारी छुपा दो साहिल ज़हर वो इनमें मिला न डालें
Shashank Singh Thakur "SAAHIL"