चुनोगे राह सच की तब नहीं कुछ डर रहेगा
हमेशा मुतमइन दिल और ऊंचा सर रहेगा
मरासिम में मसाइल रोज़ हों तो तोड़ डालो
नहीं तोड़ा तो हरदम एक दर्द-ए-सर रहेगा
भई ये शख्सियत अपनी खुले पन्ने के जैसी
यहां अंदर है जो बिल्कुल वही बाहर रहेगा
जिसे सौंपा भरोसा और जिसको दी मुहब्बत
वही समझा नहीं अफ़सोस इतना भर रहेगा
भले ही गर्दिशों से माॅंद हो जाये चमक कुछ
मगर हर हाल में गौहर तो फ़िर गौहर रहेगा
चलो मिलते हैं इक आख़िर दफ़ा है शर्त लेकिन
मिलो तन्हा नहीं तब साथ ये लश्कर रहेगा
किसी तूफान से बुनियाद कब इसकी हिलेगी
बलाओं से सदा महफ़ूज़ मेरा घर रहेगा
Seema Pandey Mishra