Kamran Abbas

मुझको ना तुम इधर उधर देखो।
एक नज़र दिल की रहगुज़र देखो।

जाने वालों से क्यों किया शिकवा।
आने वालों को इक नज़र देखो।

फ़िर रिहा हो गया हैं इक मुजरिम।
झूठ में कितना है असर देखो।

जो नहीं कह सके कभी तुमसे।
दिल की वो बात मुख़्तसर देखो।

मुद्दतों बाद हम कलाम हैं वो।
क़ैदी लफ़्ज़ों का अब सफ़र देखो।

दौर ए ज़ुल्मत में हक़ बयानों का।
सबसे आला है आके सर देखो

बज़्म-ए-याराँ की साफ़-ए-अव्वल में।
हम भी बैठे हैं बेख़बर देखो।

मुन्तज़िर जो कभी रही न मेरी
है जुदाई में ख़ू से तर देखो।

कामरान आज तक मोहब्बत का।
ख़त्म होता नहीं सफ़र देखो।
Kamran Abbas

Kamran Abbas | We The Sukhanwar