आँखों में नींद, नींद में सपना नहीं रहा
वो अब किसी भी दुनिया में मेरा नहीं रहा
साया भी मेरा रोशनी के चलते साथ है
अब तो मुझे किसी पे भरोसा नहीं रहा
पागल थे हम जो लौटके वापस भी आ गए
पर इंतज़ार में कोई बैठा नहीं रहा
सब दिन के ख़त्म होने से दुख में हैं और मै
ख़ुश हूँ दिया जला तो अँधेरा नहीं रहा
Kunal Barkade