Seema Pandey Mishra

खिलेंगे गुल भी मगर ये बहार आए तो,
है बेक़रार बहुत दिल क़रार आए तो।

तमाम किस्से हैं बातें तमाम करनी हैं
वो मेरा हम नवाज़ ग़म गुसार आए तो।

यकीं है पास मेरे लौट के वो आएगा,
है बदगुमान अभी ऐतिबार आए तो।

असीर उसको बना लूंगी फिर मैं जुल्फों का,
कभी जो हाथ मेरे इख़्तियार आए तो।
Seema Pandey Mishra