सोना-चाँदी तुम ख़रीद लो
हमको ले दो एक कटोरा
तुम लक्ष्मी की पूजा करना
हम खाएंगे भात!
बहुत अलग है हम दोनों की धनतेरस की रात!
गोदामों में तुम कुबेर की
सोने की ही मूरत रखना
कब-कब किसका भाव बढ़ाना
इसका सगुन मुहूरत रखना
इसी तरह करना त्योहारों की
स्वर्णिम शुरुआत!
बहुत अलग है हम दोनों की धनतेरस की रात!
वही कटोरा लेकर हर दिन
आएंगे हम द्वार तुम्हारे
दुनिया-भर में गुण गाएंगे
कितने हैं उपकार तुम्हारे
पीढ़ी दर पीढ़ी से होती
नई नहीं यह बात!
बहुत अलग है हम दोनों की धनतेरस की रात!
Gyan Prakash Akul