Seema Pandey Mishra

वो दुश्मन जान का ग़ुस्सा हुआ इतना बताऊॅं क्या?
दिवाली क्या मनाऊॅं और फुलझडियाँ छुड़ाऊॅं क्या?

जलाता दिल पटाखे-सा, बुरी उसकी यही आदत
मनाने से हूँ आजिज़ सोचती हूॅं रूठ जाऊॅं क्या?

सजे बाज़ार गोया आ गई जन्नत ही ख़ुद नीचे
मगर पैसे नहीं तो क्या खरीदूँ घर सजाऊॅं क्या?

दिया रस्ता जिसे कल आज वो उतरा रक़ाबत पर
बता उसकी हक़ीक़त आइना ऊसको दिखाऊॅं क्या?

बनूॅं धनवान धनतेरस को चमकूॅं रूप चौदस को
हुई फ़ेहरिस्त लंबी ख़्वाहिशों की सब गिनाऊॅं क्या?
Seema Pandey Mishra