इमाम-ए-शहर तू फ़तवे का है बड़ा माहिरकभी तो अपनी हक़ीक़त भी कर ज़रा ज़ाहिरअवाम को तू समझता है तेरी मुट्ठी मेंबहुत से आए गए तेरी तरह के साहिरTasneem Fatma