तुम मरुथल में फूल उगाना
मैं हर भटका मेघ बुलाने
आसमान तक जाऊँगा,
और किसी दिन फूलों से
धरती का आँगन भर देंगे !
जान रहा हूँ कठिन समय है
कुछ भी तो अनुकूल नहीं है
जहाँ खिले उपवन होने थे
वहाँ एक भी फूल नहीं है
तुम उपवन में नीड़ बनाना
मैं हर बे-घर पंछी लाने
आसमान तक जाऊँगा,
और किसी दिन हम उपवन का
सब ख़ाली-पन भर देंगे !
अपना केवल एक लक्ष्य है
प्यासों तक पानी ले जाना
जो जिसके हिस्से का सुख है
उस तक उसका सुख पहुँचाना
किसी मोड़ पर थक मत जाना
मैं सुख का हर सावन लाने
आसमान तक जाऊँगा,
और किसी दिन हम पीड़ा का
ख़ाली बरतन भर देंगे !
मरुथल-मरुथल फूल उगाना
हर मन का उद्योग बनाकर
हम जायेंगे इस धरती से
अपने जैसे लोग बनाकर
तुम केवल आवाज़ लगाना
मैं उसको युग तक पहुँचाने
आसमान तक जाऊँगा,
और किसी दिन हम सुगंध से
सारा उपवन भर देंगे !
Gyan Prakash Akul