सिया क्यों भटकती फिरें?

राम ने अपना वनवास ख़ुद है चुना
साथ उनके सिया क्यों भटकती फिरें?

राम के पास गुरुकुल के अनुभव तो हैं
पर सिया को कोई वन का अनुभव नहीं
इसलिए साथ जाने को तैयार हैं
पति से बढ़कर महल का तो वैभव नहीं

राम को चाहिए ये, सिया से कहें
"उर्मिला की तरह वो महल में रहें"

जन्म से अब तलक जो महल में पली
राम उसको सुखी वन में रख पाएंगे?
एक-दो दिन नहीं पूरे चौदह बरस
वे अवध की भी सीमा नहीं लांघेंगे

इसलिए राम को सोचना चाहिए
साथ अपने सिया को वो क्यों ले चलें

सात वचनों में सुख का भी है इक वचन
जो सिया को स्वयं राम ने है दिया
राम ये यदि कहें "मेरा वनवास है,
उर्मिला सँग महल में रहेंगी सिया"

राम को पूर्ण आश्वस्त करके सिया
अब अवधवासियों सँग प्रतीक्षा करें
Nitesh Divya