अब लौट जाओ

अब हमारी वापसी मुमकिन नहीं है
यार तुम ऐसा करो अब लौट जाओ

तुम गये थे छोड़ करके मोड़पर इक
रास्ता चुनना था सो हम चुन चुके हैं
खींच लायी है हमारी फ़िक़्र तुम को
कुछ नया बोलो ये पहले सुन चुके हैं
धूप की आदत बदन को लग चुकी है
सर पे मत साया करो अब लौट जाओ

राब्ता तुमसे भला अब क्यूँ रखें हम
बिन तुम्हारे हमको जीना आ गया है
अब नहीं पड़ता है कोई फ़र्क़ हमको
ख़ुद जिगर के चाक़ सीना आ गया है
बिन तुम्हारे भी है इक दुनिया हमारी
बात को समझा करो अब लौट जाओ
Nitesh Divya