कासा-ब-कफ़ खड़ा हूँ मैं ज़म्बील है यतीम
यानी तुम्हारे शहर की हर मील है यतीम
पुरसाने हाल कोई नहीं इन का आज कल
अब तो हर एक चेहरे की शरजील है यतीम
कैसे कुई चराग़ जलाए ख़ुलूस के
फ़ानूस बेअदब है तो क़िन्दील है यतीम
तस्वीर तेरी जिस पे लगाई थी प्यार से
दीवार-ए- ख़स्ता-हाल की वो कील है यतीम
लश्कर से दूर हो के जो रोता है ज़ार ज़ार
मिस्कीन है वो फ़ील अबाबील है यतीम
साहिल मसीह जब से गए छोड़ कर हमें
हम यतीम हो गए इंजील है यतीम
Shashank Singh Thakur "SAAHIL"