Nitesh Divya

रंज सहते हैं... मुस्कुराते हैं
हाल-ए-दिल हम नहीं बताते हैं

मुझपे जो लोग हक़ जताते हैं
वो मेरा हक़ ही भूल जाते हैं

वो ही करता है सबसे ज़्यादा शक़
जिससे हम कुछ नहीं छिपाते हैं

उसकी रफ़्तार के मुक़ाबिल हम
ख़ुद को ठहरा हुआ ही पाते हैं

तज़ुर्बे तो हैं आज़माएं बहुत
अबकी क़िस्मत को आज़माते हैं

ज़ख़्म-ए-दिल का इलाज करते हैं
चारागर! दिल नहीं दुखाते हैं

ज़िंदगी है अज़ाब से बदतर
बावजूद इसके मुस्कुराते हैं

दाँत आदम के हाथियों-से हैं
कुछ से खाते हैं कुछ दिखाते हैं

गोडसे आजकल के गांधी को
फूल तो झुकके ही चढ़ाते हैं

जो ये कहते हैं 'शेर पाला है!'
उनसे बच्चे न पाले जाते हैं

जब वो कहते हैं 'भाइयों-बहनों!'
भक्त फूले नहीं समाते हैं

देश में नफ़रतों के सौदागर
कौन हैं और कहाँ से आते हैं
Nitesh Divya