इसलिए त्याग सीता का करना पड़ा
राम से राज त्यागा नहीं जा सका
त्यागना ही था तो त्यागते राज को
त्याग सीता का कैसे समाधान था
ये किसी भाँति सम्मान-रक्षा नहीं
बल्कि सीता का दोहरा असम्मान था
इसलिए राजगद्दी चुनी राम ने
फिर से वनवास जाया नहीं जा सका
उन अवधवासियों ने तो देखा नहीं
सत्य माना गया फिर भी सीता-हरण
वैसे ही सिद्ध सीता की है शुद्धता
जैसे लंका-विजय जैसे रावण-मरण
साक्षी उस परीक्षा का कपि-दल भी था
उनसे भी सत्य बोला नहीं जा सका
राम थे यदि विवश लोक-अपवाद से
तो वे गुरु की शरण में भी जा सकते थे
इसके संदर्भ में यदि बुलाते सभा
वन-गमन से सिया को बचा सकते थे
राम ने पक्ष सीता का रक्खा नहीं
उनसे साहस जुटाया नहीं जा सका
त्याग-सीता का करके स्वयं राम ने
लोक-अपवाद को और दृढ़ कर दिया
राम को भी अविश्वास सीता पे था
सोचने पर प्रजा को विवश कर दिया
दण्ड भोगे निरपराध होते हुए
न्याय सीता से माँगा नहीं जा सका
Nitesh Divya