गुलों के साथ ज्यों काँटें चमन में रहते हैं
उसी तरह से ही हम भी वतन में रहते हैं
वे आदमी हैं सो वे पैरहन में रहते हैं
ये जानवर हैं जो अंदर बदन में रहते हैं
हज़ारों स्वार्थ निहित इस कथन में रहते हैं
"ग़रीब लोग ही मेरे विज़न में रहते हैं!"
बहार रूठ गई उसको जब हुआ मालूम
गुलाब सारे किसी अंजुमन में रहते हैं
सभी अँधेरों का बस एक रँग है काला पर
उजाले सात रँगों के किरन में रहते हैं
वो शख़्स पहले हमारे नयन में रहता था
अब उसके ख़्वाब हमारे नयन में रहते हैं
हम अपने ग़म का भला क्या सबब बताएँ तुम्हें
इसी वजह से तो फ़िक़्र-ओ-सुख़न में रहते हैं
उन्हें 'सिया' के बिना नींद भी नहीं आती
अगर ये सच है तो फिर क्यों भवन में रहते हैं?
Nitesh Divya