Meenakshi 'Masoom'

नींद, सुख-चैन हारकर तुम भी
शहर से लौट आए घर तुम भी

कौन आकर तुम्हें मनाता है
देख लो आज रूठकर तुम भी

फल, हवा, छाँव सब गँवा बैठे
काटकर सहन के शजर तुम भी

कल उड़ाया मज़ाक बेघर का
फिर रहे आज दर-ब-दर तुम भी

यार से गर सुलह न होती तो
देखते चाँद रात-भर तुम भी
Meenakshi 'Masoom'

Meenakshi 'Masoom' | We The Sukhanwar