दूर-दूर तक साथ तुम्हारे
जब गहरा सन्नाटा होगा
कोई गीत सुहाना लेकर
तब तुमसे मिलना चाहूँगा
अभी तुम्हारे संकेतों पर मर मिट जाने वाले होंगे
तुम सुनकर बहरे हो जाओ इतने गाने वाले होंगे
जब तुम पत्थर हो जाओगे
आवाज़ों की राह देखकर
कोई नया बहाना लेकर
तब तुमसे मिलना चाहूँगा
अभी तुम्हारे गुलदस्तों में हर दिन नए गुलाब मिलेंगे
और तुम्हारे कहने-भर से गुलशन-भर में फूल खिलेंगे
जब तुम वीराने में होगे
फूलों के अवशेष खोजते
कोई फूल पुराना लेकर
तब तुमसे मिलना चाहूँगा
भीड़ और सन्नाटे का क्रम, गुलशन या वीराने का क्रम
आता जाता ही रहता है मौसम आने-जाने का क्रम
किसी जाल में फँसकर जब
तुम राह किसी की भी देखोगे
सच में पानी-दाना लेकर
तब तुमसे मिलना चाहूँगा
Gyan Prakash Akul