नज़्म

एक ख़ला दिल में पल रही है अभी
जैसे तूफ़ान आने वाला हो
जैसे बिजली कड़कने वाली हो
जैसे कुछ टूट कर गिरा हो अभी

जैसे पैरों के नीचे से धरती
धीरे-धीरे सरकने वाली हो
जैसे सर पे बड़ा-सा बोझ कोई
बस अभी आके पड़ने वाला हो

बीस-पच्चीस साल पहले ही
हादसा हम पे यही गुज़रा था
उसी बर्बाद ज़िंदगी ने मेरे
दिल पे गहरा निशान छोड़ा था

ये निशाँ भी वही निशानी है
दिल की ये चोट कुछ पुरानी है
फ़िर भी ताज़ा है जैसे अबकी हो
ज़ख़्म पलता रहे तो अच्छा है

जो ख़ला दिल में रह गई अब तक
वो कभी ना भरे तो अच्छा है
Tasneem Fatma

नज़्म | We The Sukhanwar