Faisal Qadri Gunnauri

करवटें दिल जो बदलता है ग़ज़ल होती है
दर्द जब अश्कों में ढलता है ग़ज़ल होती है

शब ए तारीक में फ़ुरक़त में तिरी ए हमदम
जब ये दीवाना मचलता है ग़ज़ल होती है

याद ए महबूब में अफ़कार की ख़ुशबू लेने
दिल जो पहलू से निकलता है ग़ज़ल होती है

आतिश ए इश्क़ भड़कती है शब ए हिज्र में जब
दिल तिरी याद में जलता है ग़ज़ल होती है

जज़्बा ए ज़ौक़ ए जुनूँ में कोई दीवाना जब
राह पर इश्क़ की चलता है ग़ज़ल होती है

ज़िन्दगानी के किसी मोड़ पे आकर जब भी
रंग अपनों का बदलता है ग़ज़ल होती है

चलते चलते रहे उल्फ़त में जब आशिक़ फ़ैसल
ख़ुद ही गिर गिर के संभलता है ग़ज़ल होती है
Faisal Qadri Gunnauri