पहले ख़ुद पर रंग लगाया जाता है
फिर सब पर वो रंग चढ़ाया जाता है
झूठ को दे दी जाती है हद अंबर की
सच को इक संदूक दिखाया जाता है
एक तिलिस्म रचाया जाता है पहले
फिर ख़ुद को स्टार बताया जाता है
दुनिया की नज़रों में आने की धुन में
ख़ुद पर ही इल्ज़ाम लगाया जाता है
खो देता है अपना असली रूप वहीं
पानी में जब रंग मिलाया जाता है
Dr. Sonroopa Vishal