Shadab bastavi

ख़ामोश लहजे में कहते हैं लब बिछड़ना है
कि जिससे प्यार करो मुस्तहब बिछड़ना है

अगर बिछड़ना है तो बिन मिले बिछड़ जाओ
किसी से मिल के बिछड़ना ग़ज़ब बिछड़ना है

ये तल्ख़ लहजा ये ग़ुस्सा ये बे-सबब का तज़ाद
पता तो चल ही गया था कि अब बिछड़ना है

मत ए'तिबार करो मत निभाओ साथ मिरा
मुझे तो इतना बताओ कि कब बिछड़ना है

सबब न ढूंढ कि अब बात उससे आगे है
मिरे अज़ीज़ मुझे बे-सबब बिछड़ना है

कि उस घड़ी तू बिछड़ना मैं सो रहा हूं जब
बिछड़ने वाले तुझे नीम-शब बिछड़ना है
Shadab bastavi