Subhash Ehsaas

दिनों के बाद आए तो निहारता है गाँव देख
थके हुओं की सब थकन उतारता है गाँव देख

बुज़ुर्ग जा रहे हैं दुनिया छोड़ रफ़्ता रफ़्ता अब
हमें भी काँधे के लिए पुकारता है गाँव देख

बग़ैर तेरे ऐसी तिश्नगी है उसकी आँखों में
ले ले के तेरा नाम दिन गुजारता है गाँव देख
Subhash Ehsaas

Subhash Ehsaas | We The Sukhanwar