मन बदल देने की ताक़त किसी मंतर में नहीं
भूल जा तू उसे वो तेरे मुक़द्दर में नहीं
तेरे कहने पे भले सात समुंदर देखे
रंग तुझसे मेरी जानाँ किसी मंज़र में नहीं
करने वाला नहीं हूँ मैं कोई रोना-गाना
मैं ये सोचूँगा कि मैं तेरे मुक़द्दर में नहीं
लाख युद्धों को भले जीत लिया हो लेकिन
जो क़लंदर में है वो बात सिकंदर में नहीं
Aatish Indori