ये दी ये जो झोंपड़ी में रात जलते रह गए वो अमीरे शहर की आंखों में खलते रह गए सो गए देखो ज़मीं पर हम थकन को ओढ़ कर महलों वाले रात भर करवट बदलते रह गएAnwar gafil