Anwar gafil

ये दी ये जो झोंपड़ी में रात जलते रह गए
वो अमीरे शहर की आंखों में खलते रह गए

सो गए देखो ज़मीं पर हम थकन को ओढ़ कर
महलों वाले रात भर करवट बदलते रह गए
Anwar gafil

Anwar gafil | We The Sukhanwar