आपसे से कोई शिकायत भी नहीं
हम में कुछ कहने की हिम्मत भी नहीं
दोस्तों से कोई रग़बत भी नहीं
दुश्मनों से कुछ अदावत भी नहीं
ज़िन्दगी की वक़्फ़ हम ने आप पर
आप को दो पल की फ़ुरसत भी नहीं
वो तबस्सुम वो तकल्लुम शोॆख़ियां
इक क़यामत हैं क़यामत भी नहीं
आईने ने आज उनसे कह दिया
आप इतने ख़ूबसूरत भी नहीं
पूरी हो पायें तुम्हारी ख़्वाहिशें
इतनी अच्छी अपनी हालत भी नहीं
रोनक़ें गुलशन में पहली सी कहां
अब गुलों में वो नज़ाकत भी नहीं
तू अगर ख़ुद्दार है तो ये भी सुन
सर झुकाना मेरी आदत भी नहीं
सबको अपनी अपनी है फ़ैसल यहां
अब ज़माने में मोहब्बत भी नहीं
Faisal Qadri Gunnauri