Shashank Singh Thakur "SAAHIL"

इस दिल-ए-बीमार को फिर शब सुहानी चाहिए
ऐ ख़ुदा वापस मुझे मेरी जवानी चाहिए

बेवफ़ाई तेरी फितरत हर अदा तेरी फ़रेब
ऐ सितमग़र अब न तेरी मेहरबानी चाहिए

ठीक है लबरेज़ है गर ग़म से इस घर की फ़ज़ा
पर यहाँ जीने को कुछ तो शादमानी चाहिए

मेरी आहों का असर तुझ तक पहुँच जाए ख़ुदा
अब इबादत में मुझे वो कामरानी चाहिए

चार पर ही जिन परिंदों के जवाँ हैं वो भी अब
कह रहे हैं आसमाँ पर हुक्मरानी चाहिए

मेरी दुनिया जब तुम्हारे नूर से रौशन है तो
चाँद तारों की किसे फिर ज़ौ -फिशानी चाहिए

एक मुद्दत से मैं तेरा मुंतज़िर हूँ जान-ए-जाँ
तू नहीं आई तो तेरी याद आनी चाहिए

एक ज़िद ये भी है साहिल अपना घर सहरा में हो
एक ज़िद ये भी वहाँ पीने को पानी चाहिए
Shashank Singh Thakur "SAAHIL"

Shashank Singh Thakur "SAAHIL" | We The Sukhanwar