Aatish Indori

इक से बढ़ के एक वादे और भी तो हैं
कैसे बच पाएँगे झाँसे और भी तो हैं

माँ दवा दारू तेरी कैसे कराऊँ
पत्नी कहती है कि बेटे और भी तो हैं

आख़िरी होता तो मुझको चैन आता
ज़िंदगानी तेरे नख़रे और भी तो हैं
Aatish Indori