Aatish Indori

कोट तो दिखता है अस्तर नहीं दिखता मुझको
कौन रख लाया है ख़ंजर नहीं दिखता मुझको

मसअला जीत नहीं ख़ुद को बचाने का है
थक भी जाऊँ तो भी बिस्तर नहीं दिखता मुझको

सुबह होते ही कमाने को निकल जाता हूँ 
पत्नी कहती है मगर, घर नहीं दिखता मुझको
Aatish Indori

Aatish Indori | We The Sukhanwar