कोट तो दिखता है अस्तर नहीं दिखता मुझकोकौन रख लाया है ख़ंजर नहीं दिखता मुझकोमसअला जीत नहीं ख़ुद को बचाने का हैथक भी जाऊँ तो भी बिस्तर नहीं दिखता मुझकोसुबह होते ही कमाने को निकल जाता हूँ पत्नी कहती है मगर, घर नहीं दिखता मुझकोAatish Indori