जवान हाथ की धड़कन ख़रीदने वाला
कहाँ गया तिरा कंगन ख़रीदने वाला
न दिल रहा न मुहब्बत न दर्द ही कोई
ज़माना आ गया दुल्हन ख़रीदने वाला
पराए शख़्स ने दीवार भर खड़ी की थी
हमारा अपना था आँगन ख़रीदने वाला
मुझ ऐसे दास को क्या हर्ज होगा बिकने में
अगर है नन्द का नन्दन ख़रीदने वाला
Janib Vishal