मत पूछ दिल में क्या है क्यूँ तुझ से कहा नहीं
लब खोलते हैं हम भी मगर हौसला नहीं
तू बे-निशाँ हुआ तो सफ़र भी तमाम था
अब लौटना तो है ही मगर रास्ता नहीं
क्या लुत्फ़ महफ़िलों का तिरी याद के बिना
क्या रंग और क्या नूर अगर तू रहा नहीं
अब शौक़-ए-ज़िन्दगी को भी समझा चुका हूँ मैं
ये खेल यूँ ही चलता रहे फ़ायदा नहीं
Syed Amjad Hussain