KAUSAR HUSAIN

मुझसे जब लोग तिरा ज़िक्र किया करते हैं
मेरी आंखों से बहुत अश्क बहा करते हैं

सब सितम राहे मुहब्बत में सहा करते हैं
हम तो वो हैं जो न शिकवा न गिला करते हैं

हिज्र में नींद का आंखों से भला क्या रिश्ता
चांदनी रात में तारों को गिना करते हैं

क्या करें आता नहीं हमको सियासत का हुनर
हम वफ़ा वाले हैं हर इक से वफ़ा करते हैं

ऐसे लोगों से मेरा कोई भी रिश्ता ही नहीं
लोग जो दूसरे लोगों का बुरा करते हैं

जब कभी आती हैं गुलशन में बहारें "कौसर"
याद करते हैं उन्हें,आह भरा करते हैं
KAUSAR HUSAIN

KAUSAR HUSAIN | We The Sukhanwar