AJAY PRASAD

दहशत में हूँ  कहीं के मुझे प्यार  हो  न जाए
इस दौर में ये दिल कहीं बीमार हो न जाए

मिलता नहीं मैं उन से इसी खौफ़ से कभी
आँखो से मेरे इश्क़ का इज़हार हो न जाए

आ तो गया हूँ यारों मैं उनकी गली में आज
डरता हूँ के रक़ीबों से तक़रार हो न जाए

दिल और दिमाग दोनों को है फिक्र इस कदर
गफ़लत में मेरे लब  से भी इक़रार हो न जाए

वहशत मे धडकनें हैं दिन रात क्या करें
सासें ये मेरी खुद से ही  बेज़ार हो  न जाए

देखा है मैंने इश्क़ का अंज़ाम दोस्तों
साज़िश मेरे खिलाफ़ मेरे यार हो न जाए

कैसे कहूँ के उनसे मुहब्बत नहीं अजय
गुरवत हमारे दरमियां दीवार हो न जाए
AJAY PRASAD

AJAY PRASAD | We The Sukhanwar