प्रभु श्री राम पधारे हैं

अवध में गूंजा सीताराम
पूरा कर वनवास हैं लौटे
मेरे प्रभु श्री राम
अवध में गूंजा सीताराम

नर नारी पशु पक्षी सारे
हरे भरे तरुवर सब प्यारे
राम नाम रस पीकर सबके
मन को मिला आराम
अवध में गूंजा सीताराम...

नई नवेली दुल्हन जैसी सजी
अवध की नगरी है
माथे पर चंदन है सबके सर पर
राम की पगड़ी है
डगर डगर में फूल बिछे हैं दृश्य
बड़ा अभिराम
अवध में गूंजा सीताराम...

सरयू का जल छलक उठा है
मन का मंदिर महक उठा है
प्रभु के श्री चरणों के रज से
धन्य हुआ ये धाम
अवध में गूंजा सीताराम...

कण कण के नयनों में हैं जल
वरसो से सब कितने बेकल
देख सभी को रोक न पाए
अश्रु हमारे राम
अवध में गूंजा सीताराम
Shravan Kumar

प्रभु श्री राम पधारे हैं | We The Sukhanwar