" बिटिया ने बोला था पापा,
लाना चूनर तारों वाली ।
नहीं काम मिल पाया फिर से,
कैसे घर लौटूं मैं खाली ।।
ऊंची ऊंची ये मीनारें ।
झिलमिल करतीं ये बाजारें ।
मंहगे कपड़े मंहगे गहने,
सरपट दौड़ रहीं हैं कारें ।
जिसकी जेब भरी नोटों से,
उसकी तो हर रात दिवाली ।
बिटिया ने बोला था पापा,
लाना चूनर तारों वाली ।।
कितने सारे स्वप्न ओढ़ कर ।
शहर आ गया गाँव छोड़ कर ।
किसे पता था निर्मम सपने,
रख देंगे इस तरह तोड़ कर ।
अब तो लगने लगी पूर्णिमा,
जैसे मावस काली काली ।
बिटिया ने बोला था पापा,
लाना चूनर तारों वाली ।।
बिटिया बोली ओ पापा सुन ।
आयेंगे अपने अच्छे दिन ।
बस तुम मुझको गले लगा लो,
रह लूंगी मैं चूनर के बिन ।
तुम्हें देखकर लगता पापा,
पल में पूरी दुनिया पा ली ।
बिटिया ने बोला था पापा,
लाना चूनर तारों वाली ।।"
संजीव मिश्रा