Faisal Qadri Gunnauri

कभी शकिस्ता दिल ए आईना भी होता है
वफ़ा की राह में ये हादसा भी होता है

सदा बहारों का मौसम नहीं रहा करता
क़रीब दिल के जो हो वो जुदा भी होता है

अदावतों का सही ! पर मिरे रक़बों में
हर एक रोज़ मिरा तज़किरा भी होता है

वफ़ा परस्त थे सब कुछ सनम पे वार दिया
ख़बर नहीं थी सनम बे वफ़ा भी होता है

भला हों ग़ैरों से हम को शिकायतें कैसी ?
जो अपना होता है उससे गिला भी होता है

जिसे हो मौजों से लड़ने का हौंसला फ़ैसल
हक़ीक़तों से वही आशना भी होता है
Faisal Qadri Gunnauri