गीत

अपने जीवन को संघर्ष से सींचकर
हम सफलता के उपवन को महकाएंगे

हर तरफ द्वेष, पाखण्ड, षड्यंत्र है
छल कपट से ग्रसित कलयुगी तंत्र है
चाहिए बिन परिश्रम सफलता अगर
चापलूसी ही सबसे सरल मंत्र है
पर सुनिश्चित है कि ये सरल रास्ते
एक ना एक दिन बंद हो जाएंगे

सत्य, श्रम, धैर्य, संकल्प को साधकर,
मन को विश्वास की डोर से बांधकर
लक्ष्य की ओर पग बढ़ रहे अनवरत
दोष, उपहास, अवहेलना लांघकर
लाख व्यवधान जग से मिलेंगे मगर
जिनको छूना है छूकर शिखर आएंगे

हार की ग्लानि मन में रमी रह गई
नैन कोरों में दुबकी नमी रह गई
पर पराजय ने अवगत कराया सदा
कौन सी, कब, कहां पर कमी रह गई
हार से सीखकर जो बढ़े, एक दिन
जीत कर अपने परचम को लहराएंगे
Sani Singh

गीत | We The Sukhanwar